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Maya Ki Chut Ne Lagaya Chodne Ka Chaska

Maya Ki Chut Ne Lagaya Chodne Ka Chaska

                              Part : 1



सपना एक मुग्ध कन्या थी जिसने अभी अभी नई नई जवानी पाई थी. उसकी छाती पे अभी नए नए दो फूल खिल रहे थे वो जब चलती तो बड़े अच्छे से जुल जाते. वो थोड़ी श्याम रंग थी पर ब्लैक ब्यूटी थी. उसके अच्छे नाक नक्से उसे बहोत नमकीन और चुलबुली बनाते थे. वो बड़ी कटीले बदन वाली नागिन जैसी लगती थी. सपना ५-२ ऊँची, ३०-२४-३२ के मस्त फिगर वाली थी. उसका गदराया बदन, बात बात पर आंख मारके बात करना किसी को भी भा जाये. वो मेरी अच्छी दोस्त बन गयी थी.

रमाचाची बिलकुल घरेलू गृहिणी जैसी बड़ी प्यारे स्वाभाव की और काफी सुन्दर औरत थी. वो अभीभी ३५ साल की लड़की जैसी लगती थी. वो तीन बचोकी माँ होने के बावजूद उसने अपने आप को काफी मेन्टेन किया था. उस्सकी सुन्दरता उसकी बेटियों में उतरी थी. हा मनोहरचाचा अपने इस बड़े परिवार के पालन करने में और अपनी कुवारी बहेन की शादी की चिंता में थोड़े बूढ़े से लगते थे और उसे डायाबीटीस की बीमारी भी हो गयी थी. डायाबीटीस के मरीज की सेक्स लाइफ लगभग खतम हो जाती हे क्योंकी उसका लंड उत्त्थान नहीं होता. हलाकि वो रमाचाची बड़ा खयाल रखते थे. रमाचाची के चेहरे पे एक अजीब सी उदासी देखने को मिलती. मेरे पास बाइक था और चाचा के पास भी बाइक था. तो सुबह सुबह में चाचा, सीमा और सपना चारो दो बाइक पे स्कूल और कोलेज जाते थे क्यों की सीमा का होम साइंस कोलेज और सपना का हाई स्कूल हमारी कोलेज के रस्ते पे ही पड़ता था. सपना मेरी बाइक पे और सीमा अपने पापा के साथ बैठते थे. पहेले उनका स्टॉप आता था और बाद में हमारा कोलेज. दोपहर १ बजे हम चारो साथ आते और साथ में खाना खाते. में फिर ऊपर अपने कमरे में पढाई करने चला जाता और ४ बजे चाय के लिए निचे आता. रात को माया बुआ मुझे ८ बजे खाने के लिए आवाज़ देती या बुलाने छत पर आती. रात के खाने के बाद हमलोग थोड़ी इधर उधर की बाते करते टीवी देखते और १० बजे में अपने कमरे में सोने चला जाता. यह था हमारा दैनिक जीवनक्रम. में सुबह ५.३० को उठकर थोड़ी वर्जिस करता और सुबह ७.१५ को तैयार हो कर कोलेज जाने निचे आ जाता.





अब हुआ यु के इतवार को दो नो बहने किसी प्रवास में गयी थी, में सुबह ६.४५ को वर्जिस करके नहाने की तयारी कर रहा था की बुआ इतनी सुबह कपडे सुखाने आ गयी. मैंने बड़े ताजुब के शाथ बहार आ के पूछा क्यों बुआ इंतनी सुबह

में कपडे धोने पड़े, में उसे कपडे सुखाने में मदद करने लगा, तो वो बोली.

माया: हा मुना आज मुझे कोई देखने ११ बजे आने वाला हे और मेरी फेवरिट ड्रेस मेली थी तो मेने सारे कपडे सुबह सवेरे जल्दी धो डाले ताकि वो सुबह ९.३० तक सुख जाये. वो मुझे मुना कहती थी. लेकिन इतनी अच्छी बात उसने थोड़े उदास होके बताई. मैंने उसे खुस करने कहा,

में: अरे वाह ये बात अब बताती हो. क्यों भाई हम इतने पराये हे?

माया: नहीं मुना मुझे देखने लड़के १० साल से आते पर शादी कोई नहीं करता क्योंकि भगवान् ने मुझेमें एक कमी रखदी हे! मुझे देखने तो सब आते हे पर शादी के किये कोई राजी नहीं होता. इस लिए में अभीतक भैया पे बोज बनकर इस घर में अबतक बैठी हु. बात करते हुए उसकी सुन्दर आंखे नम हो गयी, उसकी आवाज़ गले में घुटने लगी.

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में: अरे ये क्या मेरी बेस्ट बुआ रो रही हे, अरे आप तो इतनी सुन्दर हो की आपसे तो कोई भी लड़का शादी के लिए तैयार हो जाये. में छोटा हु वरना में ही आप से शादी कर लेता. मैंने थोड़ी हलकी सी मजाक करके उसे हँसाने की कोशिष की.

में: बड़ा भाग्यवान होगा वो इन्सान जिससे आपकी शादी होगी! तो उस्सकी आँखे भर आई और आसू छलक कर बहार आ गए और वो बोल पड़ी-

माया: मजाक न कर मुन्ना, तू भी अगर मेरी खामी जान जाये तो तू भी शादी से मना कर देता अगर तू मेरी उम्र का होता. तुजे कैसे बताऊ के मेरे अन्दर ऐसी कमी है की में माँ नहीं बन सकती. भैया ने मेरा बहोत इलाज कराया तो पता चला के एक ऑपरेशन कराना पड़ेगा और जिसका खर्च करीब ५ लाख तक होगा. वो बात करते करते टूट सी गयी और रोने लग गयी. वैसे हुमदोनो की खूब पटती थी पर इस बात से में अनजान था, उसके रोने से में भी भाबुक हो गया. मैंने उसके आंसू पोंछे और कहा-

में: बुआ में आपका इलाज करुगा और पापा को कहकर में आपका ऑपरेशन भी करवाऊंगा, पापा को पैसे की कोई कमी नहीं और आप को में बहोत प्यार करता हु. आपके लिए में कुछभी करुगा. यह कहते हुए मेरी आंखे भी भर आई.

मुझे रोता देख उसने मुझे अपनी तरफ खीच उसने मुझे कस के अपने गले से लगा लिया, रस्सी पे सुखाये कपडॉ के पीछे हम दोनो एक दुसरे को कस के जकड़े हुए थे. यह मेरी जिंदगी का पहला अनुभव था दोस्तों की में किसी लड़की को ऐसे कस अपनी बाहों में ले के खड़ा था. माया की कठोर चुचिया मेरी विशाल छाती पे बड़े जोर से कस के दब रही थी. में उसे सांत्वन देने के लिए उसकी पीठ को सहला रहा था. मेने महसूस किया की उसने ब्रा नहीं पहनी थी. मेरा बनियान और उनका चुस्त गाउन था हमदोनो की छातीयो के बिचमे. उनके गर्म आंसू मेरे कंधे पे गिर रहे थे और में बड़े प्यार से उसकी पीठ सहला रहा था. उसका बदन भीने कपडे हो जाने के बावजूद एकदम गरम था. उसके जिस्म से एक गजब की मादक खुश्बू से मुझे नशा दे रही थी. वो कांप रही थी. उसकी गरम सांसे मेरे गले से टकरा रही और उसकी असर मेरे लंड पे हो रही थी, वो खड़ा होने लगा था और मेरी बरमूडा में एक तम्बू सा उभर गया था. मेरे बदन में मानी बिजली का जोरदार करंट दौड़ रहा हो. अचानक उसने मेरे चेहरे को अपने हाथो से पकड़ कर मेरे होठो पर अपने नरम मुलायम गरमा गरम कांपते होंठ चिपका दिए और मेरे निचे के होंठो को वो जोर से चूसने लगी. हमदोनो ही भावुक थे एक दुसरे को कस के चूम रहे थे. हलाकि मुझे लिप किस करना नहीं आ रहा था पर में उसे सहयोग दे ने लगा था. में उसके बालो को सहलाते हुए कानो तक आ गया और उसके कान बूट को प्यार से मल ने लगा. मेने पाया की वो अपने जबान से मेरे मुह खोल ने की कोशिस कर रही तो मैंने उसे सहयोग देते हुए अपना मुह खोल दिया तो उसने जट से अपनी गुलाबी जबान मेरी जबान पे मलते हुए अपने मुह में खीच ली और जोर से उसे चूस ने लगी. मेरे तो मानो प्राण निकल रहे थे. मेरी बरमूडा में मेरा लोडा एकदम टाइट होकर कड़े लोहे सा ५.५ – ६ इंच का लोहे सा कड़ा हो गया और वो माया की चूत पे टकरा रहा था. मेरा भी बदन कापने लगा और उसमे आग सी भडकने लगी. एक नसीला अनुभव जो मुझे पहली बार माया ने कराया. यह मेरे जीवन की पहली लिप किस थी जो में जिंदगीभर नहीं भूल पाउगा.




अब मुझे थोडा डर सा लगा तो मेने माया को अलग इया और अपने कमरे में ले गया और उसको पानी पिलाया. उसकी आँखों अभीभी नम थी. मैंने उसकी आँखों में एक आसू के आरपार के गजब का नशा देखा. वो कम्पन, वो बदन की दहेकती गरमी, वो मादक खुश्बू. फिर भी अपनी सेफ्टी के लिए रुका. और कहा.

में: बुआ शायद यह हम गलत कर रहे हे, कोई देख लेता तो हम बदनाम हो जाते. मेरे दिल में आपके लिए बहोत प्यार और भावना हे, परन्तु हमें ऐसा नहीं करना हे. पर आप चिंता न करो सब ठीक हो जायेगा, में आपके साथ हु, आज से आपके सारे दुःख मेरे और मेरे सरे सुख आपके. मेने महसूस किया की में उनसे आंख नहीं मिला पा रहा था क्यों की मेरी बरमूडा में से मेरे खड़े लंड से बना तम्बू उसे साफ़ दिखाई दे रहा था और में तोलिया ले के उसे छुपा ने की कोशिश कर रहा था. उसने तोलिया छिनते हुए–

माया: अरे मुना तू

ो चूमके मेरे कुलहो पर चांटा मार के कहा डॉलर की एक बेह्नी और गुलाब लाना.

में फटाफट बाइक लेके गया और एक घंटे में वापस आया तो सारे घर के मस्त सफाई हो चुकी थी और बेठने का कमरा अच्छी तरह से सजाया गया था. में सीधा रसोई में गया और सामान रमाचाची को दिया और हिसाब कर बाकी पैसे देकर माया के कमरे में गया तो में उसे देखता रह गया, वो नहा धोकर मस्त तैयार होकर बैठी थी क्या खुश्बू थी कमरे में! में गया तो उसने फट से मेरे गाल पे किस कर के ड्रेस लेते हुए कहा बहार जा. क्या इसे में तेरे सामने पह्नुगी? मेने कहा नहीं लाओ में ही पहना दू. मेने आज पहल करते हुए उसके होंठो को कस के चुम्मी ले और उसके होंठो को जोर से काटा. अपने दोने हथेलियों से उसकी चूचिया जोर से दबाई. वो दबी आवाज़ में –


माया: उई ई इ इ इ माँ, काट के खून निकालेगा क्या? ओह्ह में सब के सामने कैसे आ सकुंगी पागल. यह क्या किया. वो आईने में अपने होंठ देखने लगी. उसने मुझे जोर से धक्का दे कर अपने कमरे का दरवाजा बन्ध कर ड्रेस बदलने चली गयी. में अपने को ठीक कर बैठक के पेपर पढने बैठ गया. इतने में चाचा मेहमानों को लेके घर आ गए. उसने चाची को आवाज़ लगायी-

चाचा: अरे सुनती हो….हम लोग आ गए हे. चाचा के साथ ३ मेहमान (श्यामलालजी ६२साल के, आशादेवी की मतलब उनकी पत्नी ६० की, अशोक यानी लड़का जोकि करीब ३८ का, थोडा दुबला सा, नंबर वाले चश्मे पहने हुए, गाल अन्दर बेठे गए थे) दिखने में वो लोग बड़े श्रीमंत दीखते थे. चाचा ने उनसे मेरा परिचय अपने बेटे की तरह करवाया, मैंने नमस्ते करते हुए कहा चाचा में चाची की मदद में रसोई में जा रहा हु आपको कुछ काम तो नहीं? चाचा ने नहीं बेटा जा तू आज बिटिया भी नहीं अच्छा हे तू हे तो.

में रसोई में गया तो माया मस्त तैयार होके बनठन के पानी की ट्रे तैयार कर रही थी. बापरे आज मुझे उसका असली रूप देखने को मिला. में तो उसे देखता ही रह गया. चाची मेहमानों के पास गयी थी तो रसोई में हम दो ही थे.

माया: ऐसे क्या देखता हे? क्या मुझे कभी देखा नहीं? पागल जरा देख तो मेरे होंठ पर काटने का निशान तो नहीं. में नजदीक गया.. तो वो दूर जाने लगी और बोली –

माया: देख अभी कोई शरारत न करना, तुजे तो में शाम को देखती हु. आज तो तू गया….. देखती हु आज तुजे कोंन बचाता हे?

में: अरे यार तुम क्या लग रही हो! यह रूप तुमने अबतक कहा छुपाया था?, आज तुम क़यामत सी लग रही तो मुझसे भी रहा नहीं गया और तुजे चबाने को दिल हो गया. सॉरी …… वैसे तुम क्लास लग रही हो यार जाच रही हो..

में: बोल इस लड़के को भगाके तुजसे शादी कर लू? मैंने उसकी गांड पर जोर से फटकारा….

माया: आई… आउच…. पा…गल ये ठोंकने की आवाज़ बहार कोई सुन लेगा. वो सी सी सी करते हुए अपने कुलहो को हाथ से सहलाते हुए.. बोली ले ये पानी की ट्रे लेजा और सब को पानी पिला और भाभी को अन्दर भेज. में ट्रे लेके बैठक में गया और सब को पानी पिलाया..वो लोग अपनी बातो में मस्त थे.. मेने चाची को इशारा करके रसोई में आने को कहा.

चाची: अरे क्या बीनू… क्यों बुलाया? थोड़ी बात तो करने देती. बोल क्या हे?


माया: भाभी लड़का कैसा हे? बिचमें में टपक पड़ा और बोला –

में: बिलकुल तेरी पसंद का. भगवान् ने तेरे लिए चुनके भेजा हे. वो गुस्सा करते हुए…

माया: भाभी इसको बहार भेजो वरना में इसका गला घोट दूंगी…..

चाची: अरे तू उसे क्यों छेड़ रहा हे. इसका मेकअप ख़राब हो जायेगा. तू थोड़ी देर शांत नहीं रहेगा?

में: ना चाची इसके साथ बुआ की शादी कर ही दो और दहेज़ में मुझे इसके साथ भेज दो.

चाची: (हसते हुए) पागल अभी तू शांत रह वरना ये मेहमान जाने के बाद तेरा कचुम्बर कर देगी फिर मुझसे कोई हेल्प न मांगना. माया ने जबान निकाल कर मुझे कहा..

माया: उल्लू… बन्दर… तू रुक तेरे लिए एक पागल लड़की ढूंढ़कर तुजे एक कमरे में उसके साथ बन्ध करना हे.
चाची ने चाय नास्ते की ट्रे तैयार की और हमदोनो को सुचना दी अब यह तीनो ट्रे लेके तुम दो एक अच्छे बच्चो की तरह वहा आना और कोई शरारत मत करना वरना अपने चाचा से भी पिटोगे. मेने नास्ते की दोनों ट्रे ली और माया ने चाय एक ट्रे लेकर बैठक में गए. यह सब प्रोग्राम १२.३० तक चला और मेहमान जाने के बाद..

माया: (अपनी भाभी के गले मिलकर रोते हुए) भाभी ये लड़का मुझे अच्छा नहीं लगा पर उन्हों ने मुझे शायद पसंद कर लिया हे. मुझे ऐसे लड़के से शादी नहीं करनी.

चाची: (उसके बालो को सहलाते हुए) ना बनू ऐसा नहीं कहते पगली. तेरी खामीयो को जानते हुए उसे नज़र अंदाज़ करके उसने तुजे पसंद किया हे, ऐसे लोग कहा मिलेगे?

में भी उदास सा हो गया था. हमलोगों ने चुपचाप दोपहर का खाना खाया और में ऊपर अपने कमरे में चला गया. आज इतवार हो ने से सुस्ता रहा था तो दोपहर में सो गया. शाम होने को होगी और मुझे नींद में कुछ छूने का एहसास हुआ. मैंने आंख खोली तो माया मेरे सर के पास बेठे हुए मेरे सर को चूम रही थी.

में: (जागते हुए) उदासी से ओह तुम हो? यार तुम तो परायी हो गई.

हे तो अब मुझे कोई चिंता नहीं हे. पर अबसे तू मुझे अकेले में बुआ मत कहना क्योंकि आज से हम एक अच्छे दोस्त हे.
हलाकि मेरा तना हुआ लंड फिर से उसके सामने था. जिसे वो एकदम घुर के देख रही थी. मैंने थोडा संकोच करते हुए उसके कंधे पकड कर उसे अपने पलंग पे बिठाया और बाथरम की जा ही रहा था की उसने मुझे हाथ पकड़ कर अपने पास बिठा दिया. मेरे बालो को अपने हाथोसे सहलाते हुए बोली-

माया: जिस का इतना प्यारा दोस्त हो उसे क्या चिंता? लेकिन तू मेरा शाथ देगा न? फिर तू मुझे छोड़ तो नहीं देगा ना? तुजे पता ये मेरी ये जिंदगी बिलकुल वीरान हे.

में: हा बुआ में आपके लिए कुछ भी करूँगा. आप कह के देखना.

माया: विकी में तुज पे कितना भरोसा कर सकती हु ये बता? मुझे तुमे कुछ कहना है.

में: बेसुमार आप मुज पे भरोसा करके देख लेना… विकी भरोसे का दूसरा नाम हे बुआ.

माया: बुआ के बच्चे, मुझे माया बुला. उसने मुझे फिर से खीचकर मेरे गालो को अपने दांतों के बिच दबाकर उसे कiट लिया.

में: माया यह हम गलत कर रहे हे. तुम मुझे पे खूब भरोसा करो और कहो जो कहना हे – हलाकि में ये जानबुज कर उसे टटोल रहा था.

माया: न मुना अब अपने बिच जो भी होगा वो सही होगा. तुमे में एक बात कहू, तू आज से मेरा दोस्त और मेरे कलेजे का टुकड़ा होगा.

उसकी आवाज़ में कम्पन थी, उसकी आंख में वासना साफ़ दिखाई दे रही थी. पर में उसे तडपाना चाहता था.

माया: विकी मुझे ३० साल ख़तम होने को हे. माँ तो में १० साल की थी तब चल बसी थी, बादमें इतने सालो के बाद तेरे गले मिली हु. मुझे जो प्यार चाहिए वो किसीने नही दिया, क्या कोई औरत अपनी एक कमी होने से प्यार के काबिल नहीं होती? जब १० साल की थी तब भैया शादी करके भाभी को लाये. वो दोनों को प्यार करते में छुप छुप के देखती तो तब भी मेरे रोंगटे खड़े हो जाते. रात को भैया के कमरे से भाभी के प्यारभारी चीख मेरे कमरे में मुझे सुनाई देती तो में एक आग में जलने लगती. मुझे भी प्यार चाहिए, में चाहती हु मुझे भी कोई अपनी बाहों में कस कर मेरे होंठो का रसपान करे. मुझे अपनी बाहों में कस ले, मेरा खयाल रखे, मुझसे प्यारभरी बाते करे. मेरी सहेली सरोज अपने भतीजे से सेक्स करती हे. कभी कभी रात को ऐसे विचार आते हे तो में प्यार की आग में जलने लगती हु. मेरी छाती फट ने लगती है. में क्या करू आखिर भैया की इज्ज़त का सवाल होता हे. तू जब आया तो मेरा यकीन मान मुझे तेरी आश हुई की तू सायद मेरे लिए ही आया हे और भगवान ने शायद् तुजे मेरी प्यास बुजाने ही भेजा हे. बोल में तेरा भरोसा करू? तू चिंता मत कर में मर जाउंगी पर तुज पर आच नहीं आने दूंगी. में उसकी बात बड़े ध्यान से सुनता गया और उनकी तड़प को महसूस करता गया. हलाकि मेने कभी कुछ नहीं किया था. फिर भी उसे टटोल ने कहा.

में: माया अगर कुछ होगा तो मुझे तो कुछ नहीं आता. में अपने कोलेज में एक तम्मना नाम की लड़की जो की मेरी दोस्त हे, उससे भी दूर से बात करता हु. पता नहीं मुझे डर लगता है कही पकडे गए तो मर जायेगे.

माया: हिमत रख जब में हु तो कुछ नहीं होगा, यह कहते हुए उसने मेरी जांघ पे हाथ रखा और आहिस्ता आहिस्ता उसपर अपनी हथेली रगड़ ने लगी. मेरा टाइट लोडा देखकर बोली तुजे कुछ नहीं आता में शिखा दूंगी. वो धीरे धीरे मेरे लोडे की तरफ बढ़ रही थी, मेरे तम्बू पे हाथ रख कर कहा.



माया: क्यों इस बिचारे को दबा कर रखता हे. उससे बहार निकाल कर उसके असली घर में आने दे. उसने लपक कर मेरा लोडा बरमूडा के बहार से पकड़ लिया. मेने कहा.

में: माया अभी नहीं, तुम जाओ चाची ऊपर आ जाएगी. और आज तुमे देखने भी आ रहे हे तुम निचे जाओ. हम शाम को यही पे मिलेगे. उसकी आँखों में एक चमक आ गयी. उसने मेरे गाल में अपनी जबान रगड़ते हुए चुम्मी ली और कहा की मेरा ड्रेस सुख जाये तो ९ बजे इसमें इस्त्री करा कर लाना. वो खुश होती हुए दोड़ती निचे गयी और में नहाने चला गया.

नहाकर करीब ८ बजे में निचे चाय पिने गया तो रमाचाची ने कहा

रमा चाची: बेटा में तुजे कल बताना भूल गयी थी आज माया को बोरीवली से कुछ लोग शादी हेतु देखने आ रहे हे तो मुना तू आज कही जाने वाला तो नहीं? तूमें बेटा मेरी थोड़ी मदद करने हमारे साथ रहेगा? आज सीमा और सपना भी टूर में गयी हे और वो लोग अचानक ही आने वाले हे.

में: (खुश होते हुए और अंनजान बनते हुए) अरे बुआ आप तो बड़ी छुपी रुस्तम निकली हमें बताती भी नहीं. बुआ ने अन्दर के रूम से मुस्कुराते हुए मुझे आंख मारी.

चाची: अरे बुद्धू… लडकिया ऐसी बाते अपने मुह से




Maya Ki Chut Ne Lagaya Chodne Ka Chaska Maya Ki Chut Ne Lagaya Chodne Ka Chaska Reviewed by King's Man on September 05, 2019 Rating: 5

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